ढोलकल पर विराजे गणेश
ढोलकल पर विराजे गणे श ओम सोनी, बैलाडिला की पहाड़ियों की पहचान पुरी दुनिया में इसके गर्भ में पाये जाने वाले लौह अयस्क के कारण है। यहां का लौह अयस्क सर्वाधिक षुद्ध एवं उच्च कोटि का माना जाता है। बैलाडिला की सबसे उंची चोटी नंदीराज की चोटी है। बैल के डिले के आकार की चोटी के कारण इन पहाडियों को बैलाडिला की पहाडी के नाम से प्रसिद्ध है। ये पहाडिया लौह अयस्क से परिपूर्ण तो है साथ इन पहाड़ियों में बस्तर का अनदेखा इतिहास छिपा पड़ा है। इन पहाड़ियो में बहुत सी ऐतिहासिक प्रतिमायें बिखरी पड़ी है जो इंतजार में है दुनिया के सामने आने के लिये। ढोलकल हां एक ऐसा नाम जो अब बहूत ही प्रसिद्ध हो चुका हैं। जो कभी गुमनाम था किसी कोने में। आज यह ढोलकल पुरी दुनिया के सामने है। बैलाडिला की एक उंची चोटी है ढोलकल। ढोलकल आज पुरी दुनिया में जाना जा रहा है अपने अप्रतिम मनमोहक लुभावने वन एवं प्राकृतिक दृष्य और उस चोटी में विराजित प्रथम वंदनीय गणेषजी की प्रतिमा के कारण। मैं बहुत पहल...