सुकलू का स्वरोजगार

सुकलू का स्वरोजगार .....!

मित्रो यह सुकलू गोंड है , 65 बसंत देख चुका सुकलू कठोर श्रम के कारण अब भी स्वस्थ एवँ तन्दुरुस्त है , साल के बाकी दिनो मे खेती का काम करता है. अब गर्मी मे करने को कुछ काम तो नही है. इसलिये घर में बैठे बैठे रस्सी ही बना लेता है. प्लास्टिक के बोरो को खोलकर उन्हे बटकर मजबूत रस्सिया बना ली जाती है।
ये रस्सिय़ां गाय भैंस को बांधने मे उपयोग ली जाती है। इन रस्सियो को डामा कहा जाता है। बाजार मे एक डामा 30 रूपये मे बिकता है. आज सुकलू सुबह सुबह मेरे मोहल्ले मे डामा बेचने आया था. उसने 25 के भाव से 8 डामा बेच कर अपनी आज की 200 रूपये की रोजी पक्की कर ली. सुकलू खाली वक्त मे ऐसे ही रस्सिय़ां बना कर बेचता है.
दोस्तो फंडा यह है कि बस्तर के आदिवासी बहुत मेहनती होते है. समय का सदुपयोग कर स्वरोजगार से अपना गुजर बसर कर लेते है.

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