गोबर बोहारनी

बस्तर  का गोबर बोहारनी तिहार.......!

बस्तर में धान बोनी की शुरूवात के साथ गांवों में माटी तिहार बीज पंडुम और गोबर बोहरानी उत्सव प्रारंभ हो गया है। इसके चलते वनांचल में ग्रामीणों ने खेतों की पहली जुताई कर तीन दिनों तक उत्सव मनाया. सबसे पहले यहां के किसानों ने बोनी के उद्देश्य से अपने खेतों की पहली जुताई की।
साजा पेड़ के नीचे जमीन में कीचड़ कर तथा धान के बीज मिला कर धरती में बीज गर्भाधान की परंपरा पूरी की। इसके बाद गांव के सभी देवी देवताओं की आराधना की गई उसके बाद दर्जनों ग्रामीण पारद करने जंगल गए।

महिलाओं ने इनके पीठ में गोबर से अपनी हथेली का निशान बनाया । इधर जो लोग पारद में नहीं गए उनके ऊपर गोबर फेंक कर परंपरानुसार गालियां दीं गईं। इधर जंगल से मार कर लाए गए जंगली चूहों पकाकर सामूहिक भोज किया गया।
सैकड़ों किसान धान बीज लेकर देवगु़ड़ी पहुंचे । यहां ग्रामीणों द्वारा लाए गए बीज का कुछ हिस्सा भूमि में अर्पण करने के बाद शेष बीज ग्राम पुजारी ने लौटा दिया जिसे किसान अपने खेतों में छिड़क आए। वहीं बैलों को खेतों में चलाकर गो़ड़ खुंदनी रस्म पूरी की गई।
इस संबंध में किसानों का मानना है कि जब तक खेतों में बैंलों के पांव नहीं प़ड़ते कृषि कार्य शुभ नहीं माना जाता। इसके साथ ही गांवों में धान बोनी परंपरानुसार प्रारंभ हो गई।धान बोनी के इस त्यौहार को कहीं माटी तिहार तो कही बीज पंडुम कहा जाता है। वैसे ही सुकमा जिला के धुरवा क्षेत्र में इसे गोबर बोहरानी कहते हैं। अधिकतम शेयर करें।

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