कुटरू

कुटरू की रोशनी ......!
बस्तर मे कुटरु ज़मींदारी सबसे बड़ी ज़मींदारी थी. महाराज अन्नमदेव के समय इस ज़मींदारी की स्थापना का अपना रोचक इतिहास है. 1947 मे बस्तर के विलय के बाद ज़मींदारी प्रथा स्वमेव बन्द हो गई. कुटरू बीजापुर ज़िले के इन्द्रावती राष्ट्रीय उद्यान मे एक छोटी सी बस्ती है.
आजादी से पूर्व निर्मित कुटरू ज़मींदारो का राज भवन अब ध्वस्त होकर खंडहर हो गया. पास ही पुराने कच्चे घर मे उस समय की पुरानी चीजे अब भी यहां वहां बिखरी पड़ी है .

घर की चौखट पर लोहे की सांकल मे लटके इसे दिये ने मेरा ध्यान खिंचा. पुराने समय में सम्पन्न परिवारो के घर की चौखटो पर लटकते हुए ऐसे दिये रोशनी किया करते थे.
लगभग सत्तर साल से यह दिया वही लटका हुआ , फर्क बस यह आ गया है कि यह अब कभी जलता नही. और भी ऐसे बहुत सी पुरानी चीजे अब भी चीख चीख कर अपना महत्व बता रही है , विडम्बना यह है कि इनके संरक्षण एवं सुरक्षा की सुध लेने वाला कोई नही है........ओम ..!

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